सिनेमा हिन्दी सीखने का सबसे बडा माध्यम है: निलंति राजपक्ष
नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न हुआ। संगोष्ठी में वैश्विक स्तर पर हिंदी शिक्षण की 'दशा और दिशा' पर विचार विमर्श हुआ। हिंदी विभाग के 'कृतिसंग', बी.ए. प्रोग्राम सोसाइटी 'रचनायन' और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वेद प्रकाश सिंह ओसाका विश्वविद्यालय, जापान से, प्रो . निलंति राजपक्ष यूनिवर्सिटी ऑफ श्री जयवर्धनेपुरा, श्रीलंका से और दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से डॉ. सुनील कुमार वर्मा ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य . प्रो.योगेश्वर शर्मा की। कार्यक्रम का संचालन अनिरुद्ध सुधांशु ने किया । धन्यवाद ज्ञापन प्रो. धनंजय दुबे ने किया। प्रो निलंति राजपक्ष ने हिंदी की वैश्विक स्थिति को लेकर श्रीलंका के विषेश सन्दर्भ में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सिनेमा हिन्दी सीखने का सबसे बड़ा माध्यम है। डा वेद प्रकाश सिंह ने कहा कि हिन्दी के प्रति लगाव पैदा करने और सरकार को विदेश में हिन्दी और केन्द्र शुरू करने और रोजगार से जोड़ने की जरूरत पर बल दिया। गिरमिटिया देशों में हिन्दी और हिन्दी के विस्तार के इतिहास को लेकर लंबी चर्चा करते हुए डा सुनील वर्मा ने कहा कि हिन्दी की वैश्विक स्थिति का इतिहास वृहद है और आज डिजिटल युग यह विस्तार कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कालेजों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहें। बी.ए.प्रोग्राम समिति के संयोजक डॉ. डी.एस.आर. रेड्डी ने सभी छात्रों और शिक्षकों के प्रति आभार जताया । हिन्दी विभाग प्रभारी प्रो. राम चरण मीना ने सफल आयोजन के लिए सभी को धन्यवाद दिया।
संगोष्ठी में शिक्षक,शोधार्थियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया और संगोष्ठी में लगभग पचास शोध पत्र पढ़े गए। विभिन्न कालेजों के शिक्षकों के साथ हिन्दी विभाग के प्रो.अनिल कुमार, प्रो संदीप कुमार, डा योगेश रस्तोगी,संस्कृत विभाग के चंद्रशेखर त्रिपाठी, कालिंदी कॉलेज के डा लवकुश कुमार, खालसा कॉलेज के डा.अमरेंद्र पांडेय, दौलत राम कॉलेज के संतोष भारद्वाज, अनिल कुमार जयंत और विभिन्न कालेजों के छात्र मौजूद रहे।
शोध पत्र लिखने की कला पर बात करते हुए हेमंत कुमार सिंह,हिंदी विभाग ने कहा कि शोध लेखन कोई पत्र लेखन नही है या सिर्फ अभिव्यक्ति नही है, बल्कि तथ्य की खोज है। आपको इसमें ध्यान रखना होता है कि तथ्य आधारहीन नही हो। बच्चो को शोध में इसका ध्यान रखना चाहिए। इस सत्र में शोध पत्र पढ़ने वाले सभी लोगो को बहुत बधाई और अयोजन समीति को बहुत बधाई कि उन्होंने छात्रों शिक्षको को मौका दिया।

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