डीयू अकादमिक परिषद की 1026 वीं बैठक:
कई विभागों के लिए एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को मिली स्वीकृति
अपने-अपने फील्ड के 20-20 बेस्ट जर्नल्स की लिस्ट 30 दिन के अंदर सबमिट करें विभाग: प्रो. योगेश सिंह
नई दिल्ली, 15 अप्रैल।
दिल्ली विश्वविद्यालय अकादमिक परिषद (एसी) की 1026 वीं बैठक का आयोजन कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में 15 अप्रैल, 2026 को हुआ। बैठक के दौरान कई विभागों के लिए एक वर्षीय स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। गौरतलब है कि एनईपी 2020 के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय में चार वर्षीय स्नातक का चौथा वर्ष पूर्ण होने जा रहा है। इसलिए आगामी शैक्षणिक स्तर से एक वर्षीय पीजी कोर्स शुरू होने जा रहे हैं। अकादमिक परिषद की इस बैठक के दौरान विभिन्न संकायों के अंतर्गत, 'स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम ढांचा 2024' (पीजीसीएफ़) पर आधारित पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
सामाजिक विज्ञान संकाय एवं भाषाओं जैसे कुछ विभागों के विषयों में स्कोप्स जर्नल्स की अनुपलब्धता के कारण पेपर प्रकाशित होने में कठिनाई के मुद्दे पर विचार विमर्श के उपरांत कुलपति ने सभी विभागों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने फील्ड के 20-20 बेस्ट जर्नल्स की लिस्ट बनाएं और 30 दिन के अंदर उसे सबमिट करें। उन्होंने कहा कि विभाग जर्नल्स के लिए मानदंड तय करें और उनके लिए अंक निर्धारित करें। उसके आधार पर ही नंबर देकर जर्नल्स की वरीयता सूची तैयार करें। बैठक के आरंभ में ज़ीरो ऑवर के दौरान अकादमिक परिषद के सदस्यों ने अनेकों मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की और अपने-अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता द्वारा एजेंडा प्रस्तुत किया गया जिस पर सभी सदस्यों द्वारा चर्चा हुई।
अकादमिक परिषद की अकादमिक मामलों पर स्थायी समिति की सिफारिशों पर विचार के उपरांत कला संकाय के दर्शनशास्त्र विभाग में दो वर्षीय और एक एमए दर्शनशास्त्र के विभिन्न सेमेस्टरों के पाठ्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार पंजाबी, हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत आदि अनेकों पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। डीयू के दूरस्थ एवं सतत शिक्षा विभाग (SOL/COL) के अंतर्गत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आधारित स्नातक पाठ्यक्रम ढांचा 2022 (UGCF 2022) के अनुसार, स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के विद्यार्थियों हेतु पाठ्यक्रमों की सेल्फ लर्निंग मेटेरियल (SLM) को भी स्वीकृति प्रदान की गई। सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत, दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (पत्रकारिता एवं जनसंचार); गणितीय विज्ञान संकाय के अंतर्गत, गणित के पहले व दूसरे सेमेस्टर के लिए एक वर्षीय एमएससी गणित और तीसरे व चौथे सेमेस्टर के लिए दो वर्षीय एमएससी गणित को स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार कंप्यूटर विज्ञान, हिंदी विभाग में एम.ए. हिंदी पत्रकारिता के दूसरे सेमेस्टर सहित कई विषयों के पाठ्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान की गई।
मेडिकल और एजुकेशन में नए कोर्स मंजूर
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में DM (Paediatrics Nephrology) कोर्स शुरू करने को भी एसी मीटिंग में स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत प्रति वर्ष दो सीटों पर प्रवेश होगा। ‘रिसर्च काउंसिल’ का नाम बदलकर ‘रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल’ करने को भी स्वीकृति प्रदान की गई। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में डीएम (मेडिकल जेनेटिक्स) कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी गई, जिसमें प्रति वर्ष दो सीटों पर प्रवेश होगा। महर्षि वाल्मीकि कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में शैक्षणिक सत्र 2026-2027 से 50 सीटों के साथ एम एड दो वर्षीय प्रोग्राम शुरू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई; हालांकि यह स्वीकृति केवल तभी मान्य होगी, यदि कॉलेज खाली और स्वीकृत पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी कर लेता है और 30 अप्रैल, 2026 तक (अधिकतम सीमा) अपनी एनसीटीई मान्यता को मार्च 2026 से आगे बढ़वा लेता है।
एसओएल में संचालित होंगे मल्टीमीडिया और जनसंचार जैसे नए प्रोग्राम
शैक्षणिक सत्र 2027-28 से दिल्ली विश्वविद्यालय के डीडीसीई, एसओएल और सीओएल में कुछ ऑफ़लाइन/ओडीएल मोड और ऑनलाइन मोड के स्नातक तथा स्नातकोत्तर कार्यक्रम अकादमिक परिषद की बैठक में स्वीकृत किए गए हैं। हालांकि कुलपति ने कहा कि यह स्वीकृति “सैद्धांतिक स्वीकृति” है, पूरी तैयारियों के बाद ही इन्हें शुरू किया जाएगा। डीयू एसओएल द्वारा ऑफ़लाइन/मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा मोड के तहत एमए (अंग्रेज़ी) तथा बीए आनर्स (मल्टीमीडिया और जनसंचार) नामक नए प्रोग्राम संचालित करने की योजना है। ऑनलाइन मोड के तहत बीकाम (आनर्स), बीए (आनर्स) अंग्रेज़ी, मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, बीएससी (आनर्स) कंप्यूटर साइंस शुरू किए जाएंगे। इनके अलावा विदेशी भाषाओं में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी संचालित होंगे जिनमें जर्मनी और रोमन्स स्टडीज विभाग में फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, पुर्तगाली और इतालवी में प्रोग्राम संचालित होंगे। पूर्वी एशियाई अध्ययन विभाग में चीनी, कोरियाई और जापानी भाषा में और स्लेवोनिक एवं फिनो-उग्रियन अध्ययन विभाग में रूसी भाषा में कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ देगा विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान में पढ़ने की सुविधा
यूजीसीएफ़-2022 के तहत किसी विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान के साथ 'सेमेस्टर अवे प्रोग्राम' शुरू करने पर विचार किया गया। रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता ने बताया कि सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (SAP) एक सहयोगात्मक व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय में नामांकित छात्र (अर्थात् दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी विभाग/केंद्र/कॉलेज में नामांकित छात्र) अपने अध्ययन कार्यक्रम का एक सेमेस्टर किसी विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान (एफ़एचईआई) में पूरा कर सकते हैं। छात्र द्वारा एफ़एचईआई से अर्जित क्रेडिट को डिप्लोमा/डिग्री प्रदान करने के उद्देश्य से गिना जाएगा, बशर्ते कि ये क्रेडिट ऐसे कोर्स कंटेंट/पाठ्यक्रम से अर्जित न किए गए हों जो एक-दूसरे से मेल खाते हों। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में बदलाव का मतलब है छात्रों को ऐसे कोर्स और संस्थान चुनने की आज़ादी देना, जिनसे उनके ज्ञान, कौशल और अलग-अलग सीखने के माहौल से परिचय में बढ़ोतरी हो, ताकि वे अपना शैक्षणिक मार्ग खुद तय कर सकें। यूनिवर्सिटी ने अपने विभागों/केंद्रों/कॉलेजों में अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम कर रहे छात्रों को पढ़ाई के कुछ खास स्तर पूरे करने के बाद, प्रोग्राम से बाहर निकलने के कई विकल्प दिए हैं। हालाँकि, विभागों/केंद्रों/कॉलेजों के छात्रों को प्रोग्राम के बीच में ही किसी विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान (एफ़एचईआई) में एक सेमेस्टर बिताने की अनुमति देना भी उतना ही ज़रूरी है। ऐसे छात्र एफ़एचईआई में मिलने वाले अनुभव का लाभ उठा सकेंगे, वहाँ से हासिल किए गए क्रेडिट को डिग्री/योग्यता पाने के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे, और फिर भी उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही अपनी डिग्री मिलेगी।


