वेलनेस टूरिज्म में दुनिया में अग्रणी है भारत: गजेंद्र सिंह शेखावत

 वेलनेस टूरिज्म में दुनिया में अग्रणी है भारत: गजेंद्र सिंह शेखावत

डिग्री प्राप्त करने के साथ ही समाप्त नहीं होती लर्निंग, शिक्षा आजीवन प्रक्रिया: प्रो. योगेश सिंह

‘पर्यटन, सामुदायिक विकास और आजीवन शिक्षा: समकालीन भारत में नीतिगत परिप्रेक्ष्य और अवसर’ विषय पर डीयू में हुआ विशेष कार्यक्रम का आयोजन 

                                       


नई दिल्ली, 23 मार्च। 

केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा की वेलनेस टूरिज्म में भारत दुनिया में अग्रणी है। पर्यटन (टूरिज्म) में अब लोग केवल ‘डेस्टिनेशन’ नहीं, बल्कि ‘एक्सपीरियंस’ को महत्व देने लगे हैं, जो पर्यटन के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अभी भारत की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 5% के करीब है जिसे वर्ष 2047 तक 10% तक ले जाना है। शेखावत दिल्ली विश्वविद्यालय के सतत शिक्षा एवं विस्तार विभाग द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्य मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह लोकसभा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. सोरेन एहलर्स और कार्यक्रम के कन्वीनर डीसीईई विभाग के अध्यक्ष प्रो. कुमार आशुतोष थे। 

                         


‘पर्यटन, सामुदायिक विकास और आजीवन शिक्षा: समकालीन भारत में नीतिगत परिप्रेक्ष्य और अवसर’ विषय पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देश-दुनिया के पर्यटन परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा “मास्टर इन टूरिज्म” जैसे पाठ्यक्रम की शुरुआत समयानुकूल और दूरदर्शी कदम है, जो युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने पर्यटन को विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए कहा कि वैश्विक जीडीपी में इसका योगदान 10% से अधिक है। भारत में पिछले वर्ष लगभग 294 करोड़ से अधिक पर्यटन यात्राओं का आंकड़ा इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने यूएनडब्ल्यूटीओ के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की हिस्सेदारी अभी भी 1% से कम है, लेकिन बीते वर्षों में भारत ने तेजी से प्रगति करते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राकृतिक विविधता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपरा इसे एक विशिष्ट पर्यटन गंतव्य बनाती है।

                       


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि “लर्निंग एक डिग्री प्राप्त करने के साथ ही समाप्त नहीं हो जाती (Learning does not end with a degree)” शिक्षा आजीवन प्रक्रिया है। कुलपति ने युवाओं को निरंतर सीखने और स्वयं को लगातार विकसित करने के लिए प्रेरित किया। प्रो. योगेश सिंह ने पर्यटन को आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि वर्तमान में भारत के जीडीपी में पर्यटन का कुल योगदान लगभग 5.22% है, जिसमें 2.72% प्रत्यक्ष योगदान शामिल है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन “Terrorism divides, but tourism unites” का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यटन न केवल आर्थिक प्रगति को गति देता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करता है। उन्होंने गुजरात के धोरडो गाँव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का उदाहरण देते हुए बताया कि दूरदर्शी सोच और योजनाबद्ध विकास से किसी क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन केंद्र में बदला जा सकता है।

                            


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि केवल डिग्री और डिप्लोमा ही किसी व्यक्ति को महान नहीं बनाते; बल्कि ज्ञान, अनुभव और सांस्कृतिक समझ ही उसकी वास्तविक पहचान होती है। उन्होंने पर्यटन को ज्ञान, संस्कृति और विचारों के आदान-प्रदान का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। लोकसभा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने अयोध्या में बने राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या आज वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहां प्रतिदिन लाखों पर्यटक पहुँच रहे हैं, जिससे रोजगार और आय के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। कार्यक्रम के आरंभ में विभागाध्यक्ष प्रो. कुमार आशुतोष ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में पर्यटन को आजीवन शिक्षा से जोड़ते हुए कहा कि आज के समय में कौशल ही सफलता की असली पहचान है। उन्होंने युवाओं को अपने व्यक्तित्व विकास और सकारात्मक दृष्टिकोण पर कार्य करने की सलाह दी। डीयू के सर शंकर लाल हाल में आयोजित इस कार्यक्रम में अनेकों शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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