दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने सोसाइटी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया


समावेशी राष्ट्रीय विकास के लिए भारत के विशाल युवा मतदाता सूची को ऑनलाइन, डिजिटल एवं मिश्रित अधिगम द्वारा उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की अत्यंत आवश्यकता है: आशीष सूद 

                


नीति संवाद, एडोजिट-सहायक और डिजिटल संयुक्त अधिगम में वैश्विक श्रेष्ठता के साझाकरण का महत्वपूर्ण मंच यह सम्मेलन प्रस्तुत करता है: प्रो. योगेश सिंह  

नई दिल्ली, 29 जनवरी। 

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण एवं सतत शिक्षण विभाग, स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग, मुक्त शिक्षायन परिसर द्वारा राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रशिक्षण परिषद (नैक) एवं ब्रिटिश काउंसिल के सहयोग से आयोजित "मुक्त, गहन, डिजिटल एवं मिश्रित शिक्षण में उभरती प्रवृत्ति एवं सहयोग" विषय पर प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का कार्यक्रम विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्घाटन गुरुवार को हुआ, इस अवसर पर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए, जबकि सम्मेलन में दिल्ली विश्वविद्यालय के संरक्षक प्रो. योगे सिंह ने की। 

                 


सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने अपनी प्रार्थना में कहा कि भारत के विशाल युवा नामांकन को ऑनलाइन, डिजिटल, मिश्रित अधिगम के माध्यमों से उपलब्ध उच्च शिक्षा नामांकन राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भारत 2047 के सिद्धांतों को विकसित किया, जिसमें शिक्षा का सशक्तिकरण, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक व्यक्तित्व का प्रमुख आधार बताया गया, जिससे युवा नागरिक राष्ट्रों के निर्माण में योग्यता योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि भारत का ज्ञान साझा करने की परंपरा मुक्त स्टार्टअप सामग्री, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, स्वयं मंच, शिक्षक बैंक ऑफ क्रेडिट और राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय जैसे पहलों में शामिल है। यह सुधार उच्च शिक्षा में पहुंच, संपत्ति और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रभावशाली उपयोग करता है और भारत को समग्र और व्यापक अधिगम के वैश्विक केंद्र के रूप में मजबूत बनाता है।

               


दिल्ली विश्वविद्यालय के पितृ पक्ष प्रो. योगेश सिंह ने अपने राष्ट्रपति पद के भाषण में मराठा शिक्षा क्षेत्र के विश्वविद्यालय में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने मुक्त शिक्षा विद्यालय और मुक्त शिक्षा परिसर के माध्यम से समग्री, लचीली और भविष्य की शिक्षा प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन रियलिटी संवाद, उद्यम-सहायक और डिजिटल एवं मिश्रित निगम में वैश्विक श्रेष्ठता कार्यक्रमों के साझाकरण का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। मुक्त शिक्षा परिसर के निदेशक प्रो. पाली मागो एवं मुक्त शिक्षा विद्यालय के कार्यशाला प्रो. अजय जयसवाल ने मुक्त और सशक्त शिक्षा के प्रभावशाली वास्तुशिल्प में नवाचार, गुणवत्ता सुरक्षा, शिक्षा सहायता उपकरण और सिंचाई क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में राष्ट्रीय पुस्तकालयों के संग्रहालय पहलों को स्थापित करता है।

       


इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के मुक्त शिक्षा परिसर के निदेशक प्रो. पाइलि मागो, दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों के अधिष्ठाता प्रो. बलराम पाणि, दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद के निदेशक प्रो. गणेशन कण्बिरन, लंदन स्थित ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा केंद्र के निदेशक डॉक्टर लिंडा अमराने कूपर, अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्रीय शिक्षा परिषद के महासचिव डॉक्टर टोरून गेल्सविक, नेशनल एडगम ​​संगठन के शिक्षा निदेशक डॉक्टर टोनी मेज़, और दिल्ली विश्वविद्यालय के मुक्त शिक्षा विद्यालय के कार्यशाला प्रो. अजय जयसवाल सहित कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षाविद, नीति-निर्माता और शिक्षा क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 . योगेश सिंह को मुक्त एवं तिलक शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीय संघ का अध्यक्ष चुना गया

कार्यक्रम के दौरान मुक्त एवं फ़्लोरिडा शिक्षा समूह के अंतर्राष्ट्रीय संघ की प्रथम अध्यक्षीय बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में संसाधन साझा करना, मुक्त स्टार्टअप आरंभ के प्रोत्साहन और मुक्त एवं उद्यम शिक्षा फर्मों के माध्यम से सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि स्तर समुच्चय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इस बात पर सहमति बनी कि यह संघ एक गैर-सैन्य संगठन के रूप में कार्य करता है और इसके संविधान सदस्य को अंतिम रूप से अलग कर दिया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के पितृ पक्ष प्रो. योगेश सिंह को अध्यक्ष एवं मुक्त शिक्षा परिसर के निदेशक प्रो. पाइलि मागो को चुना गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांतों का सम्मलेन यह शिक्षा के भविष्य की पुनर्कल्पना का सारगर्भित संवाद, सहयोग एवं नवाचार को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर मुक्त, उदार, डिजिटल एवं शैक्षिक शिक्षण के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को शामिल करना का उद्देश्य है।

                 


 

29 से 31 जनवरी तक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया 

मान्यता है कि यह तीन दिव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन दिल्ली विश्वविद्यालय के रॉकेट एवं सतत शिक्षा विभाग, मुक्त शिक्षा विद्यालय और मुक्त शिक्षा परिसर द्वारा राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रयास परिषद और ब्रिटिश काउंसिल के सहयोग से 29 से 31 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन से पूर्व आश्रम 28 जनवरी 2026 को आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में भारत और कलाकारों से बड़ी संख्या में कलाकारों की तस्वीरें रही हैं। सम्मेलन-पूर्व कार्यक्रम में भी उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में मुख्य विज्ञापन, पूर्ण सत्र, शोध पत्र एवं पोस्ट प्रस्तुतियाँ, परिचर्चाएँ और उभरती हुई स्टार्टअप के प्रदर्शन शामिल थे। प्रमुख विषयों में शिक्षा में कृत्रिम कृति, नवीन शिक्षण प्रतिमान, मूल्यांकन सुधार, शिक्षार्थी शैतान, समानता और समावेशन, रोजगारोन्मुखी और सतत मुक्त एवं सांस्कृतिक शिक्षा प्रतिमान शामिल हैं। सम्मेलन के कार्यवाहियों के अंतर्गत मुक्त एवं सतत शिक्षा विभाग, मुक्त शिक्षा विद्यालय, मुक्त शिक्षा परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विज्ञान भवन में मुक्त शिक्षा विद्यालय के मेधावी छात्रों के लिए एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस महोत्सव के अध्यक्ष मुक्त शिक्षा परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. पाइप मागो ने की और साउथ कैंपस, दिल्ली यूनिवर्सिटी के निदेशक प्रो. रजनी अब्बी अतिथि अतिथि के रूप में मुख्य अतिथि के रूप में। इस अवसर पर सामुहिक एवं संरक्षकों की उपस्थिति में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिससे उनकी उत्कृष्टता को शामिल किया गया और समावेशी एवं गुणवत्ता पूर्ण उच्च शिक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की अनावृत उद्घोषणा हुई।

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