लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न: विशेषज्ञों ने कहा—भारतीय ज्ञान परंपरा ही 'विकसित भारत @2047' का आधार
दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं श्री काशी विद्वत् परिषद् (दिल्ली प्रांत) के संयुक्त तत्वावधान में 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं भारतीय विद्याओं का पुनर्जागरण @2047' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा, अध्यात्म और राजनीति जगत के शीर्ष विद्वानों ने भारतीय शिक्षा के भविष्य और सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर गहन मंथन किया।
प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी (अध्यक्ष, शासी निकाय) ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए अपने स्वागत में सत्यनिकेतन में हुई त्रासदी पर दुःख व्यक्त किया।उन्होंने इस विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज इतने प्रकांड विद्वानों का आगमन हमें अभिभूत कर रहा है। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने विषयांतर करते हुए काशी विद्वत परिषद के योगदान को रेखांकित किया।उन्होंने भारतीय संस्कृति के विविध पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन की परम्परा को आगे बढ़ाने का काम काशी विद्वत परिषद लगातार कर रही है।इसी का प्रतिफलन है आज का आयोजन। मुख्य वक्ता - प्रो. रमाकांत पांडेय (कुलपति, उत्तराखंड संस्कृत संस्कृत विश्वविद्यालय): उन्होंने 'भारतीय भाषाएं, कला, साहित्य और विज्ञान' पर प्रकाश डालते हुए कहा, "हमारी भाषाएं सिर्फ संवाद का साधन नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान का अथाह भंडार हैं। ज्योतिष और प्राचीन भारतीय विज्ञान को आज के युवाओं के समक्ष तार्किक रूप से प्रस्तुत करने की जरूरत है।"
विशिष्ट वक्ता - प्रो. शिवशंकर मिश्र (कुलपति, महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय, उज्जैन): व्याकरण और भाषा विज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, "भारतीय ज्ञान पद्धति में समाहित नैतिक मूल्य ही समाज में नवाचार और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। सामाजिक नीतियों के क्रियान्वयन में इन मूल्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।"
विशिष्ट अतिथि - माननीय पूनम शर्मा (विधायक, वजीरपुर): उन्होंने शिक्षा में आ रहे इन बदलावों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक भारतीय विद्याओं का पुनर्जागरण देश को एक नई दिशा देगा।संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में प्रो. विनय पाण्डेय (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) ने ज्योतिष और दर्शन के वैज्ञानिक पहलुओं को सामने रखा, वहीं प्रो. दिनेश गर्ग (सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय) ने उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली के व्यावहारिक प्रयोग पर बल दिया। प्रो. नचिकेता सिंह (प्राचार्य, श्याम लाल महाविद्यालय, सांध्य) ने भारतीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परम्परा के महत्व को रेखांकित किया।
अध्यक्षीय भाषण - प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय (अध्यक्ष, संस्कृत भारती): उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा, "जब तक हम अपनी जड़ों, अपनी भाषाओं और अपने सनातन जीवन मूल्यों पर गर्व नहीं करेंगे, तब तक वास्तविक बौद्धिक स्वतंत्रता संभव नहीं है। उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणालियों (IKS) का समावेश आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।"
कार्यक्रम की सफलता में संगोष्ठी संरक्षक-मंडल के सदस्यों का विशेष मार्गदर्शन रहा। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन प्रो. सुनीता अरोड़ा (निदेशक, IQAC)और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. लता शर्मा (प्राचार्य, लक्ष्मीबाई महाविद्यालय) ने किया.संगोष्ठी संयोजक डॉ. सुनील कुमार मिश्र (सहायक प्रोफेसर एवं महामंत्री, श्री काशी विद्वत् परिषद्) द्वारा किया गया। इस संगोष्ठी में देश भर से आए सैकड़ों प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की।


