उप राष्ट्रपति ने किया डीयू में ड्रग-फ्री कैंपस अभियान का शुभारंभ
केवल शैक्षणिक गतिविधियों के केंद्र ही नहीं होते विश्वविद्यालय, ये देते हैं मूल्यों को आकार: श्री सी.पी. राधाकृष्णन
मदद मांगना कमजोरी नहीं, समझदारी है: धर्मेंद्र प्रधान
डिग्री बांटने का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का आधार हैं हमारे कैम्पस: आशीष सूद
डीयू को ड्रग फ्री कैम्पस बनाने के लिए करेंगे हर संभव प्रयास: प्रो. योगेश सिंह
नई दिल्ली, 13 जनवरी।
दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा ड्रग-फ्री कैंपस अभियान “नशामुक्त परिसर अभियान” का शुभारंभ मंगलवार, 13 जनवरी को किया गया। इस अवसर पर उप राष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन बतौर मुख्य अतिथि और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विशिष्ट अतिथि और दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद सम्मानीय अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की। कार्यक्रम का आयोजन डीयू के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित मल्टीपर्पस हॉल में किया गया। इस अवसर पर मुख्यातिथि द्वारा बटन दबा कर ड्रग-फ्री कैंपस पोर्टल और मोबाइल एप्प को भी लॉन्च किया गया। कुलपति प्रो. योगेश सिंह द्वारा कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति के प्रति शपथ भी दिलवाई।
नशामुक्त परिसर अभियान का शुभारंभ करते हुए उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनकी डीयू की पहली यात्रा है और कई बार ऐसा होता है कि पहली यात्रा भी बहुत ही ऐतिहासिक बन जाती है। मुझे यह विश्वास है कि आज जो आंदोलन हम यहाँ से शुरू कर रहे हैं, आप सबके सहयोग, कठोर परिश्रम, लगन और नई भावना से हम केवल अपने परिसर को ही नहीं बल्कि पूरे देश को ड्रग फ्री बनाएंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक गतिविधियों के केंद्र ही नहीं होते, ये वो स्थान होते हैं जहां मूल्यों को आकार दिया जाता है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि डीयू के चांसलर के रूप में मुझे गर्व है कि हमारा विश्वविद्यालय पूरे देश के लिए इस आंदोलन की शुरुआत कर रहा है। यह केवल हमारे परिसर को ही ड्रग फ्री नहीं रखेगा, बल्कि हमारे जागरूकता कार्यक्रम इस देश के प्रत्येक नागरिक को भी प्रेरित करेंगे। उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे वेद और उपनिषद भी संयम और सात्विक जीवन पर ज़ोर देते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एकमात्र ध्येय है कि 2047 तक भारत दुनिका की नंबर अर्थव्यवस्था बने; और यह केवल युवाओं के प्रयासों से ही संभव है। नशामुक्त युवक कौशल को आसानी से सीखते हैं और एंट्रप्रेनयोरशिप को बढ़ावा देते हैं तथा देश की आर्थिक प्रगति में सहयोग देकर राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ड्रग ट्रेड नार्को टेरेरिजम को बढ़ावा देता है। इस व्यापार में अत्यधिक मुनाफा तो है, लेकिन वह समाज और मानवता की कीमत पर है। इसलिए हम सबको इसके खिलाफ खड़े होना है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ट्रंप यूएसए के पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने दुनिया के ड्रग माफिया के खिलाफ आवाज उठाई। मैं उनके प्रयासों की सराहना करता हूँ, क्योंकि हमारे प्रधान मंत्री की तरह वह एकमात्र बड़े नेता हैं जो ड्रग के विरुद्ध आगे आए हैं। उप राष्ट्रपति ने कहा कि ड्रग फ्री युवा केवल निजी और आर्थिक विकास के लिए ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि हमारे देश की समृद्धि और स्थायित्व के लिए भी जरूरी हैं।
इस अवसर पर बतौर विशिष्ट अतिथि पहुंचे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ड्रग न तो फ़्रीडम है और न रेवेलियन है। ड्रग की आदत बिलकुल भी कूल नहीं है। जो क्यूरियस्टी और एक्सपरिमेंटेशन से शुरू होता है, वो अक्सर डिपेंडेंसी, खराब हैल्थ और बर्बाद फ्युचर पर खत्म होता है। अपने परिजनों के बारे में सोचें, उनके त्याग और आपकी सफलता की उनकी उम्मीदों के बारे में सोचें। उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी पहले से स्ट्रगल कर रहा है तो यह जान ले कि सहायता उपलब्ध है। मदद मांगना कमजोरी नहीं, समझदारी है। काउन्सलिन्ग और स्पोर्ट सिस्टम को उपयोग करें ताकि रिकवरी संभव हो; आपका भविष्य अभी भी आपके हाथ में है। शिक्षा मंत्री ने दिल्ली विश्वविद्यालय को ड्रग फ्री उच्च शिक्षण संस्थान बनाने के संकल्प के लिए डीयू को बधाई देते हुए इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमें डीयू में ऐसा कैम्पस कल्चर बनाना होगा जहां वेलबींग (wellbeing) को प्राथमिकता मिले। दिल्ली विश्वविद्यालय देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक उदाहरण बने। दूसरे संस्थान डीयू से सीखेंगे और सर्वोत्तम प्रथाएं अपनाएँगे। इसी तरह सिस्टमिक चेंज होता है। एक संस्थान रास्ता दिखाता है और बाकी अनुसरण करते हैं तथा एक राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत होती है। इस अवसर पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे कैम्पस केवल डिग्री बांटने का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का आधार हैं। उन्होंने कहा कि डीयू की इस पहल को दिल्ली के हर स्कूल और कॉलेज में लागू करने का काम करेंगे।
डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने डीयू के ड्रग फ्री कैम्पस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि डीयू को “नशा मुक्त भारत अभियान” के साथ मिलकर “ड्रग फ्री कैम्पस अभियान” लॉन्च करते हुए गर्व महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि ड्रग फ्री एजुकेशनल कैम्पस विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने, अकादमिक सफलता को बढ़ावा देने और सुरक्षित लर्निंग वातावरण बनाने के लिए आवश्यक हैं। यह हमारी, शिक्षकों की और विश्वविद्यालयों की जिम्मेवारी है। कुलपति ने कहा कि हम डीयू को ड्रग फ्री कैम्पस बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि डीयू के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट द्वारा तंबाकू छोड़ने की राष्ट्रीय हेल्पलाइन सेवाएँ शुरू की गई हैं। जहां बजने वाली फ़ोन की हर घंटी किसी न किसी को निकोटीन की लत और पुरानी बीमारी से वापस लाने का एक मौका देती है। इस अवसर पर डीन ऑफ कॉलेजेज़ प्रो. बलराम पाणी, दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता और “नशामुक्त परिसर अभियान” के कोऑर्डिनेटर प्रो. राजेश सहित अनेकों डीन, डायरेक्टर्स, प्रिंसिपल, अधिकारी, शिक्षक, गैर शिक्षक कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।




