विश्व भाषा के रूप में प्रतिष्ठित होती हिन्दी की राह में भाषा की राजनीति एकमात्र अवरोध: डॉ. कर्मानंद आर्य
विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर जगजीवन महाविद्यालय गया जी के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में हिन्दी का विश्व और विश्व की हिन्दी विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का आरंभ द्वीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत गीत के साथ किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) सत्येंद्र प्रजापति ने विश्व हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिन्दी में लिखत-बोलते समय विशेष रूप से सचेत रहने की आवश्यकता है। हिन्दी की संगोष्ठी में हम नए शब्द सीखते हैं। यह इस संगोष्ठी उपलब्धि है।
इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. कर्मानंद आर्य ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि भाषा की राजनीति को समझने की आवश्यता है। बोली से भाषा और भाषा से बोली बनने की प्रक्रिया सतत रूप से चलती रहती है। यदि हम अपनी बोली और भाषा के प्रति सचेत व जागरूक नहीं रहेंगे तो हमारी कई भाषाएं विलुप्त हो जाएंगी। वहीं, हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ प्रदीप कुमार ने अध्यक्ष समेत सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्व में कई महत्त्वपूर्ण विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। इसलिए हिन्दी में ना सिर्फ देश के भीतर बल्कि विश्व में भी रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। सम्मानित वक्ता के तौर पर डॉ. शिव कुमार रविदास ने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब भारत वर्ष की राष्ट्र भाषा हिन्दी विश्व भाषा के रूप में उभर कर सामने आएगी तथा भविष्य में एक दिन ऐसा भी होगा जब हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी अंतरराष्ट्रीय संगठनों में कामकाज की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकृति मिलेगी। वह क्षण हिन्दी के हित चिंतकों के लिए गौरव का क्षण होगा। शीघ्र ही हिन्दी राष्ट्र भाषा से अंतरराष्ट्रीय भाषा के सफर को तय करेगी। मंचासीन शिक्षक संघ की सचिव संगीता कुमारी ने कहा कि हिन्दी राजभाषा है जिसका प्रचार प्रसार तेजी से हो रहा है। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए हिन्दी विभाग की डॉ. संगीता कुमारी ने कहा कि हिन्दी के माध्यम से अभिव्यक्ति की जटिलता को हम अच्छे से समझते हैं। यह चुनौती तब और भी बढ़ जाती है जब अँग्रेजी जैसी भाषा के साथ हमारा साबका पड़ता है। इस दौरान कई शोधार्थियों ने शोध-पत्र पढ़ा।
शोध-पत्र पढ़ने वाले शोधार्थियों में संजना कुमारी, प्रभात कुमार, अनिल कुमार, अजीत कुमार, महेश कुमार शर्मा आदि शामिल थे। जबकि संगीत की प्रस्तुति एवं स्वागत गान में प्रीति कुमारी, ऋतु कुमारी, नाहिद, संगीता कुमारी एवं बिंदिया आदि सम्मिलित थी। उक्त कार्य में भरी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद थे। जिनमें डॉ. अनुरानी, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. नारायण कुमार, डॉ. शोभा एवं श्री रवि रंजन के अलावे श्री वीणेश सिंह, मो. जफर आदि का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। मंच संचालन मगध विश्वविद्यालय की शोध छात्रा रश्मि प्रसाद ने किया।



