*विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ ने डॉ. शशि भूषण कुमार को विद्यासागर (डी.लिट.) की मानद उपाधि से किया सम्मानित*
*मानवाधिकार पत्रकारिता, शिक्षा, साहित्य एवं भारतीय संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को मिला सम्मान; देश-विदेश से मिली बधाइयां*
वैशाली। मानवाधिकार पत्रकारिता, शिक्षा, साहित्य, हिंदी भाषा एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिहार के वैशाली जिले के निवासी वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद् डॉ. शशि भूषण कुमार को विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, ईशीपुर-बाराहाट द्वारा प्रतिष्ठित 'विद्यासागर (डी.लिट.)' की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें विद्यापीठ के 27वें वार्षिक अधिवेशन सह सम्मान समारोह में प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से न केवल वैशाली और बिहार, बल्कि पत्रकारिता एवं साहित्य जगत में भी हर्ष का माहौल है।भागलपुर जिले के ईशीपुर स्थित केजरीवाल धर्मशाला में 1 नवंबर 2026 को आयोजित इस भव्य समारोह की अध्यक्षता विद्यापीठ के कुलाधिपति रामजन्म मिश्र ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. प्रेमचंद पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय विधायक श्री मुरारी पासवान एवं मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर नेहा कुमारी ने कुलगीत एवं स्वागत गान प्रस्तुत कर समारोह को गरिमामय बनाया।
समारोह में विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. देवेन्द्र नाथ साह ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। सम्मान सत्र में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हिंदी साहित्यकारों एवं विद्वानों को विद्यासागर, विद्या वाचस्पति, साहित्य भूषण तथा कवि रत्न जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से सम्मानित किया गया। इसी क्रम में डॉ. शशि भूषण कुमार को उनके बहुआयामी सामाजिक, शैक्षणिक, साहित्यिक एवं पत्रकारिता संबंधी योगदान के लिए विद्यासागर (डी.लिट.) की मानद उपाधि प्रदान की गई।
मानवाधिकार पत्रकारिता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका
डॉ. शशि भूषण कुमार बिहार के वरिष्ठ पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, शिक्षाविद् एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। वे मानवाधिकार टुडे के संपादक तथा सार्क जर्नलिस्ट फोरम, बिहार के अध्यक्ष हैं। लंबे समय से वे मानवाधिकारों के संरक्षण, सामाजिक न्याय, वंचित एवं कमजोर वर्गों की आवाज को मंच प्रदान करने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती के लिए पत्रकारिता के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उनकी पत्रकारिता केवल समाचारों के प्रकाशन तक सीमित नहीं रही है, बल्कि समाज में व्याप्त विसंगतियों, मानवाधिकारों के उल्लंघन, सामाजिक असमानता और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना भी उनके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। सार्क देशों के पत्रकारिता जगत में मानवाधिकार पत्रकारिता को मजबूत बनाने तथा पत्रकारों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संवाद और सद्भाव को बढ़ावा देने की दिशा में भी उनका निरंतर प्रयास रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी निभा रहे हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
पत्रकारिता के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी डॉ. कुमार का उल्लेखनीय योगदान है। वे हाजीपुर स्थित टैगोर किड्स एंड हाई स्कूल के निदेशक हैं। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानते हुए वे विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक चेतना, भारतीय संस्कृति और मातृभाषा के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के पक्षधर रहे हैं।
हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए भी वे विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक मंचों से जुड़े हुए हैं। मातृभाषा के सम्मान, हिंदी साहित्य के विकास और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उनकी सक्रियता उल्लेखनीय रही है।
वैशाली की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास
लोकतंत्र की प्रथम धरती वैशाली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं लोकतांत्रिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत करना भी डॉ. शशि भूषण कुमार की विशिष्ट पहचान रही है। वे बिहार की गौरवशाली परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक उपलब्धियों को व्यापक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।उनका मानना है कि पत्रकारिता, साहित्य और शिक्षा समाज को सकारात्मक दिशा देने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसी सोच के साथ वे सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और अंतरराष्ट्रीय सद्भाव को अपने कार्यों का आधार बनाते रहे हैं।
पूर्व में भी मिल चुके हैं कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान
डॉ. शशि भूषण कुमार को इससे पूर्व भी पत्रकारिता, मानवाधिकार, शिक्षा, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें 'विद्या वाचस्पति' सम्मान से भी विभूषित किया गया है। इसके अतिरिक्त साउथ अमेरिकन वेस्टर्न यूनिवर्सिटी द्वारा मानवाधिकार के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई है।
विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ द्वारा प्रदान की गई विद्यासागर (डी.लिट.) की मानद उपाधि उनके लंबे सामाजिक एवं बौद्धिक योगदान के सम्मान के रूप में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
समारोह में कई राज्यों के साहित्यकार हुए सम्मानित, नई कार्यकारिणी का भी हुआ गठन
विद्यापीठ के 27वें वार्षिक अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में देहरादून के बी.के. डोभाल, नागपुर के जमीन अंसारी, कोलकाता के राम कुमार झा, वैशाली के डॉ. शशि भूषण कुमार, भागलपुर के विनोद कुमार राय, गोपाल नारसन, हाजीपुर के रविन्द्र कुमार रतन तथा हरिद्वार के डॉ. आनंद भारद्वाज सहित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं दिल्ली के अनेक साहित्यकार शामिल रहे।
इस अवसर पर विद्यापीठ की नई कार्यकारिणी का भी सर्वसम्मति से गठन किया गया। श्री देवेन्द्र नाथ साह को कुलाधिपति, डॉ. प्रेमचंद पाण्डेय को कुलपति तथा श्री प्रीतम कुमार को कुलसचिव चुना गया।
समारोह के तीसरे सत्र में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें महेन्द्र निशाकर, बी.के. डोभाल, जमील अंसारी, विनोद कुमार राय, जयंत जलद, सच्चिदानंद किरण, राम कुमार झा निकुंज, सुदामा महतो, योगेश कौशल, डॉ. इन्दुभूषण मिश्र, देवेन्दु, नेहा कुमारी सहित दो दर्जन से अधिक कवियों ने अपनी स्वरचित रचनाओं का पाठ किया। डॉ. प्रेमचंद पाण्डेय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बधाइयों का लगा तांता
डॉ. शशि भूषण कुमार को विद्यासागर (डी.लिट.) की मानद उपाधि मिलने पर देश-विदेश के पत्रकारों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।
बधाई देने वालों में श्रीलंका से पत्रकार राहुल समांथा एवं अतिला कोठलावाला, नेपाल से पत्रकार राजू लामा, बांग्लादेश से पत्रकार अब्दुल रहमान, भूटान से पत्रकार बामची, अमेरिका से डॉ. मृदुल कीर्ति, कतर से श्रीमती शालिनी वर्मा एवं श्रीमती विनीता कँवर, लंदन से वंदना खुराना एवं तेजेंद्र शर्मा, बहरीन से राममणि तिवारी, ऑस्ट्रेलिया से सुनीता शर्मा, थाईलैंड से सुनील सेतपॉल, नीदरलैंड से रामा तक्षक तथा कनाडा से स्नेह ठाकुर सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल हैं।
सभी ने इस सम्मान को डॉ. शशि भूषण कुमार के वर्षों के संघर्ष, समर्पण, कर्मठता और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सम्मान बताया। साथ ही उम्मीद जताई कि वे भविष्य में भी मानवाधिकार पत्रकारिता, शिक्षा, साहित्य, हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में इसी प्रकार महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।
डॉ. शशि भूषण कुमार की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि जब पत्रकारिता सामाजिक जिम्मेदारी, शिक्षा मानवीय मूल्यों और साहित्य सांस्कृतिक चेतना के साथ आगे बढ़ता है, तो उसका प्रभाव समाज की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचता है।
