दिलों को जोड़ने के लिए भौगोलिक निकटता जरूरी नहीं: युवा संगम के तमिल छात्रों से बोले DU कुलपति प्रो. योगेश सिंह
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की परिकल्पना को साकार करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में 'युवा संगम फेज़-7' के अंतर्गत तमिलनाडु से आए शिक्षकों और विद्यार्थियों का भव्य स्वागत किया गया। वाइस रीगल लॉज स्थित काउंसिल हॉल में आयोजित इस सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने तमिल भाषा में 'वडक्कम' कहकर सभी का आत्मीय अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरियाँ दिलों को जोड़ने में कभी बाधा नहीं बनतीं और तमिलनाडु तथा दिल्ली में कोई भेद नहीं है, क्योंकि हम सब एक भारत के एक ही परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने दिल्ली को भारत का हृदय बताते हुए छात्रों से आह्वान किया कि वे यहाँ से जाते समय कम से कम पांच पक्के मित्र बनाकर लौटें ताकि दोनों राज्यों के बीच यह भावनात्मक संबंध हमेशा जीवंत रहे।
इससे पूर्व, कल रात्रि दिल्ली पहुंचने पर विश्वविद्यालय की समन्वय टीम ने रेलवे स्टेशन पर ही सभी आगंतुक छात्रों का गर्मजोशी से स्वागत किया था। आज प्रातःकाल इन युवाओं ने गांधी भवन में योगाभ्यास और जलपान के साथ अपने दिन की शुरुआत की और इसके बाद विश्वविद्यालय की जीव विज्ञान प्रयोगशाला का शैक्षणिक भ्रमण किया। मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम और कुलगीत से हुई, जिसके बाद युवा संगम के नोडल अधिकारी प्रो. के.पी. सिंह ने कुलपति महोदय को तुलसी का पौधा, महात्मा गांधी पर केंद्रित पुस्तक और अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही मंच पर उपस्थित डीन ऑफ कॉलेजेस प्रो. बलराम पाणी, डीन प्लानिंग प्रो. निरंजन कुमार, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रंजन त्रिपाठी और एआईसीटीई की सदस्य सचिव प्रो. उमा रथ सहित पूरी आयोजन टीम को भी अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अनूठी पहल के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए नोडल अधिकारी प्रो. के.पी. सिंह ने बताया कि युवा संगम भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक प्रमुख युवा विनिमय योजना है, जिसका मूल मकसद विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच पारस्परिक समझ, अंतरराज्यीय मैत्री और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को सुदृढ़ करना है। इसके माध्यम से युवाओं को दूसरे राज्यों की संस्कृति, भाषा, विकास, तकनीकी प्रगति और सामाजिक व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है। कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने तमिलनाडु की प्राचीन भाषा, संस्कृति और महान संत तिरुवल्लुवर के अमूल्य योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारी भाषाओं और उच्चारण में भले ही थोड़ा अंतर हो, लेकिन हमारी भावनाएं और आत्मा बिल्कुल एक हैं। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. चारू कालरा ने किया और अंत में प्रो. श्यामा रथ के धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस गरिमामयी समारोह का समापन हुआ, जिसमें प्रो. गीता भट्ट, प्रो. मनोज केन और प्रो. हंसराज सुमन सहित कई वरिष्ठ प्राध्यापक उपस्थित रहे।
