डीयू अकादमिक परिषद की 1025 वीं बैठक
गेस्ट और एडहॉक पर बोले कुलपति: हम डीयू का कल्चर बदलना चाहते हैं.
साल में दो बार की जानी चाहिए शैक्षणिक नियुक्तियां, कॉलेज नियमित आधार पर करें स्थाई नियुक्तियां: प्रो. योगेश सिंह
नई दिल्ली, 05 दिसंबर।
दिल्ली विश्वविद्यालय अकादमिक परिषद (एसी) की 1025 वीं बैठक का आयोजन कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में 05 दिसंबर, 2025 को हुआ। बैठक के दौरान ज़ीरो आवर में गेस्ट और एडहॉक शिक्षकों के मुद्दे पर पर बोले कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि " हम डीयू का कल्चर बदलना चाहते हैं। आस्थाई नियुक्तियों की बजाए स्थायी नियुक्तियां की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि साल में दो बार शैक्षणिक की नियुक्तियां की जानी चाहिए। कुलपति ने कालेजों से कहा कि गेस्ट टीचर रखने की बजाए नियमित आधार पर स्थाई नियुक्तियां करें कॉलेज। "
जीरो ऑवर
बैठक के आरंभ में ज़ीरो ऑवर के दौरान परिषद के सदस्यों ने अनेकों मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की और अपने-अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक के दौरान रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता द्वारा एजेंडा प्रस्तुत किया गया। जिस पर सभी सदस्यों द्वारा चर्चा हुई। बैठक के दौरान एक सदस्य द्वारा मुद्दा उठाए जाने पर कुलपति ने कहा कि सभी कॉलेज अपने यहां स्पोर्ट्स के लिए कोच नियुक्त करें। इसके साथ ही कॉलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी के मुद्दे पर कुलपति ने कहा कि जिस भी कॉलेज को ऐसी दिक्कत हो वह हिफा से अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए धन मांगे। प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि यह अच्छा मौका है, अगर यह योजना बंद हो गई तो फिर दिक्कतें हो सकती हैं इसलिए कॉलेज इस मौके का फायदा उठाएं।
नॉर्दर्न रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल में 9 पीजी मेडिकल कोर्स शुरू
नॉर्दर्न रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल (NRCH) में इंडियन रेलवे पोस्ट-ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (IRPGIMSR) में 9 पीजी मेडिकल कोर्स शुरू होंगे। हालांकि यह नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 के तहत नेशनल मेडिकल कमीशन से इजाज़त मिलने पर निर्भर करेगा। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने बताया कि नॉर्दर्न रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल (NRCH) में इंडियन रेलवे पोस्ट-ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (IRPGIMSR) में खोले जाने वाले इन पीजी मेडिकल कोर्स को डीयू द्वारा मंज़ूरी दे दी गई है।
इन कोर्सों में हर शैक्षणिक वर्ष के लिए सीटों के सालाना इनटेक का विवरण भी दिया गया है। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में अप्लाई की गई पीजी सीटों की संख्या की विषयवार जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि एनेस्थीसिया में 4, जनरल मेडिसिन में 4, जनरल सर्जरी में 4, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में 2, ऑप्थल्मोलॉजी में 4, ऑर्थोपेडिक्स में 4, ओटोरहिनोलैरिंगोलॉजी में 4, पीडियाट्रिक्स में 2 और पैथोलॉजी में 4 सीटों का प्रावधान रखा गया है।
पीएचडी कोर्स वर्क के लिए गाइडलाइंस
दिल्ली विश्वविद्यालय के विभागों में अलग-अलग विषयों में पढ़ाए जा रहे कोर्स वर्क के पैटर्न में अंतर को देखते हुए पीएचडी कोर्स वर्क के लिए गाइडलाइंस में बदलाव किए गए हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए डीयू रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट अपने-अपने विषय में पीएचडी प्रोग्राम देते हैं। इस प्रोग्राम के ज़रूरी हिस्से के तौर पर, हर डिपार्टमेंट में पीएचडी कोर्स वर्क कराया जा रहा है। यह देखा गया है कि अलग-अलग विषयों में पढ़ाए जा रहे कोर्स वर्क के पैटर्न में अंतर है। इसलिए, अलग-अलग विषयों में पीएचडी कोर्स वर्क में एक जैसा लाने के लिए, शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से लागू करने के लिए यह गाइडलाइंस बनाई गई हैं।इन गाइडलाइंस के अनुसार पीएचडी कोर्सवर्क के लिए कुल 12 से 16 क्रेडिट ज़रूरी हैं। क्रेडिट बंटवारे के अनुसार रिसर्च मेथोडोलॉजी या एडवांस्ड रिसर्च मेथोडोलॉजी (उन स्टूडेंट्स के लिए जिन्होंने पहले ही रिसर्च मेथोडोलॉजी पढ़ी है) के लिए 4 क्रेडिट, रिसर्च पब्लिकेशन एथिक्स के लिए 2 क्रेडिट, रिसर्च टूल्स के लिए 2 क्रेडिट और डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव कोर्स (रिसर्च एरिया से जुड़ा) के लिए 4 क्रेडिट होंगे। ज़रूरत पड़ने पर डीएसई से 4 और क्रेडिट लिए जा सकते हैं। यह स्पेशलाइज़्ड एरिया में लागू होगा और ऐसे कोर्स पीजी स्टडीज़ में ऑफर नहीं किए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि पीएचडी कोर्स वर्क के टीचिंग घंटे फैकल्टी के वर्कलोड में शामिल हैं।
नेशनल और इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस/सेमिनार में भाग लेने वाले डीयू डेलीगेट्स के लिए गाइडलाइंस पारित
दिल्ली विश्वविद्यालय के डेलीगेट्स को भारत में होने वाले नेशनल और इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस/सेमिनार/सिम्पोजियम/वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आर्थिक मदद देने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए गाइडलाइंस तय कर दी गई हैं। इन गाइडलाइंस के अनुसार उन फ़ैकल्टी मेंबर्स को विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार ट्रैवल ग्रांट लेने की इजाज़त होगी, जो किसी भी एकेडमिक इंस्टिट्यूशन के टॉप 500 क्यूएस/ टॉप 500 टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड रैंक/ टॉप 100 एनआईआरएफ़ रैंक वाले इंस्टिट्यूशन/संबंधित डिसिप्लिन में से किसी एक में पेपर प्रेज़ेंट करने जाते हैं। विश्वविद्यालय/इंस्टीट्यूशन/संबंधित डिसिप्लिन की रैंकिंग वही होगी जो एप्लीकेशन जमा करते समय लागू हो। अथवा अगर कोई फैकल्टी मेंबर भारत में किसी ऐसे नेशनल/इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस/सेमिनार में पेपर प्रेजेंटेशन के लिए ट्रैवल ग्रांट के लिए अप्लाई करता है, जिसे कोई एकेडमिक इंस्टीट्यूशन ऑर्गनाइज नहीं करता, बल्कि नेशनल कांग्रेस/थीमैटिक एरिया की नेशनल एसोसिएशन जैसी किसी बहुत मशहूर, नेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त इंडिपेंडेंट एंटिटी ऑर्गनाइज करती है, तो कमेटी ट्रैवल ग्रांट की रिक्वेस्ट पर विचार करने से पहले कॉन्फ्रेंस/ऑर्गनाइजिंग बॉडी के स्टैंडर्ड और प्रेजेंट किए जाने वाले पेपर की क्वालिटी को ऑब्जेक्टिव तरीके से जांच सकती है। उन कॉन्फ्रेंस को भी अलाउड किया जाएगा जहाँ कॉन्फ्रेंस की प्रोसीडिंग्स या तो स्कोपस इंडेक्स्ड या वेब ऑफ़ साइंस इंडेक्स्ड जर्नल्स में पब्लिश हुई हों।


