साहित्य अकादेमी द्वारा रामदरश मिश्र की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

 साहित्य अकादेमी द्वारा रामदरश मिश्र की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

                          


      स्नेह से भरे शताब्दी पुरुष थे रामदरश मिश्र

             


साहित्य अकादेमी द्वारा रामदरश मिश्र की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

                 


नई दिल्ली। 13 नवंबर 2025; साहित्य अकादेमी ने आज प्रख्यात हिंदी साहित्यकार रामदरश मिश्र की स्मृति में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जिसमें सभी ने उन्हें एक सहज, सजग और संपूर्ण साहित्यकार के रूप में याद करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने उन्हें भारतीय साहित्य के सबसे बड़े रचनाकार के रूप में याद करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को एक तपस्वी के जीवन के समकक्ष माना।


उन्होंने उनके संतुलित जीवन और हिंदी की संकीर्णता से दूर रहकर निरंतर सृजन के लिए याद किया। साहित्य अकादेमी की उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा ने उनके गाँव के उदार, सर्वग्राही एवं परस्पर पूरक व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा मन से गाँव के समीप ही रहे। 

उनका आस्था का संदेश हम सब का संबल रहेगा। साहित्य अकादेमी की सचिव पल्लवी प्रशांत होळकर ने रामदरश मिश्र का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रकाश मनु ने अपने लिखित संदेश में कहा कि साहित्यकारों की एक पूरी पीढ़ी ने उनसे साहित्य के मायने, जीने के और लिखने के मायने सीखे। 


अपने सारे सुख-दुख, तकलीफों के बावजूद किसी लेखक का स्वाभिमान से सिर उठाकर जीना क्या होता है, यह हम रामदरश मिश्र जी से सीख सकते हैं। उन्होंने उन्हें तपस्वी साहित्यकार के रूप में याद करते हुए कहा कि वे हिंदी के सरल स्नेह से भरे शताब्दी पुरुष थे। श्रद्धांजलि सभा में ऑनलाइन जुड़े प्रख्यात गुजराती लेखक और उनके शिष्य रहे रघुनाथ चौधरी ने कहा कि वे अपने शिष्यों और पाठकों के प्रति बहुत आत्मयीता रखते थे। 

                


उनके ग्राम जीवन के संस्कार हमेशा उनके साथ रहे और उन्होंने उनका साथ कभी नहीं छोड़ा। साहित्य अकादेमी के पूर्व अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने उन्हें एक ऐसे लेखक के रूप में याद किया, जिसका जीवन विशुद्ध रूप से लेखन के लिए समर्पित था। उन्हें ‘कलम का किसान’ कहते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न आंदोलनों से दूर रहकर उन्होंने सरल और सहज लेखन किया जिसकी संवेदनशीलता हम हमेशा महसूस करते रहेंगे। बालस्वरूप राही ने मॉडल टाउन में उनके साथ बिताए दिनों को याद करते हुए कहा कि वे अहंकार मुक्त और बहुत भोले साहित्यकार थे, जिन्होंने जिस विधा को भी छुआ उसको अविस्मरणीय बना दिया। 


उन्होंने उनकी कुछ ग़ज़लों के शेर प्रस्तुत करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदी ग़ज़ल को, उर्दू ग़ज़ल की ऊँचाई प्रदान की। वीरेंद्र जैन ने उन्हें एक ऐसे लेखक के रूप में याद किया जो संवाद पर विश्वास करते थे और सबको धैर्य से सुनते थे। अनिल जोशी ने उन्हें नए रचनाकारों को प्रोत्साहित करने वाला लेखक बताते हुए कहा कि वे नए लेखकों के लिए पथ प्रदर्शक थे। शिवनारायण, अलका सिन्हा, नरेश शांडिल्य, वेद मित्र शुक्ल, राजकुमार गौतम, दिनेश लखनपाल, प्रताप सिंह ने भी उन्हें उनकी ऊर्जा, नए लेखकों का प्रोत्साहन और हर किसी की रचना प्रक्रिया को संवारने वाले एक वटवृक्ष के रूप में याद किया।      


उनकी पुत्री स्मिता मिश्र ने उनकी आशावादिता को उनके पाठकों तक पहुँचाने के संकल्प के साथ उनकी स्मृति में बनाए गए रामदरश मिश्र ट्रस्ट की जानकारी देते हुए बताया कि उनके परिवार का यह सपना है कि रामदरश मिश्र अपने शब्दों से हम सबके बीच जिंदा रहें। कार्यक्रम के आरंभ में सभी ने उनके चित्र पर पुष्पार्पण किया अंत में उनके प्रति एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि सभा समाप्त हुई।

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