डीयू में दृष्टिहीन विद्यार्थियों को लैपटॉप उपलब्ध करवाने के लिए बनेगी नीति: प्रो. योगेश सिंह

 डीयू में दृष्टिहीन विद्यार्थियों को लैपटॉप उपलब्ध करवाने के लिए बनेगी नीति: प्रो. योगेश सिंह 

डीयू कुलपति ने किया दृष्टिहीन लेखकों द्वारा लिखित दो पुस्तकों का लोकार्पण 

नई दिल्ली, 23 फरवरी। 

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए ज़िंदगी बहुत कठिन होती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले दृष्टिहीन विद्यार्थियों को विश्वविद्यायल की ओर से विशेष लैपटॉप उपलब्ध करवाने के लिए नीति बनाई जाएगी। कुलपति दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय में राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ द्वारा आयोजित दो पुस्तकों के लोकार्पण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। यह दोनों पुस्तकें दृष्टिहीन लेखकों द्वारा लिखी गई हैं। इस अवसर पर पुस्तक “अंतिम जन तक” की लेखक प्रो. कुसुमलता मलिक और पुस्तक “प्रज्ञा-नयन” के लेखक डॉ. राम अवतार शर्मा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पुस्तकों के ब्रेल संस्करण का भी लोकार्पण किया गया।  

इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि 90% दृष्टिहीन लोग गरीब देशों में रहते हैं और उनमें से एक तिहाई आबादी भारत में निवास करती है। इनके लिए हमें सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है। कुलपति ने तकनीक के युग में इस वर्ग के लिए विशेष कौशलों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए अब विशेष मोबाइल फोन और लैपटॉप भी उपलब्ध हैं, लेकिन अगर लुई ब्रेल उस ब्रेल लिपि को विकसित न करते तो शायद आज ये उपकरण भी न बनते। लुई ब्रेल ने ब्रेल लिपि बना कर दुनिया भर के दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए बहुत बड़ा काम किया था और डॉ. राम अवतार शर्मा ने अपने ग्रंथ “प्रज्ञा-नयन” के माध्यम से ब्रेल के जीवन को काव्यबद्ध करके उन्हें अमर कर दिया है। “अंतिम जन तक” पुस्तक की विषय-वस्तु पर चर्चा करते हुए कुलपति ने कहा कि दृष्टिहीनों की अंत: दृष्टि बहुत ही विलक्षण हो जाती है, लेकिन उनके लिए हमारी जिम्मेवारी भी बहुत अधिक बनती है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों के प्रति समाज को सोच बदलने की जरूरत है। 

पुस्तक “अंतिम जन तक” के नायक संतोष कुमार रुंगटा ने अपने संबोधन में कहा कि दृष्टिहीन लेखकों द्वारा लिखित इन पुस्तकों की उपलब्धता सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन का माध्यम बन सकती है। इस पुस्तक की लेखक प्रो. मलिक ने कहा कि लोग अपना 80% ज्ञान आँखों से ही ग्रहण करते हैं जबकि पूर्ण दृष्टिहीन व्यक्ति उस ज्ञान से वंचित होते हैं। वह तो अधिकतर ज्ञान आवाज से ही ग्रहण करते हैं। इस अवसर पर लेखक प्रो. कुसुमलता मलिक और डॉ. राम अवतार शर्मा के अलावा आर्ट्स फ़ैकल्टी के डीन प्रो. अमितवा चक्रबोर्ती, हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो. कुमुद शर्मा, संतोष कुमार रुंगटा, जेपी अग्रवाल, प्रो. भारतेन्दु पाण्डेय और प्रो. राजकुमार सहित अनेकों शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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